क्या दीन से बड़ी हो गयी है जींस? बेढ़ंगा पेहराव आम करने में 'टेलरों' का भी बड़ा हाथ नौजवानों के मांँ-बाप और उलमा-ए-दिन भी ध्यान दें!
क्या दीन से बड़ी हो गयी है जींस?
बेढ़ंगा पेहराव आम करने में 'टेलरों' का भी बड़ा हाथ
नौजवानों के मांँ-बाप और उलमा-ए-दिन भी ध्यान दें!
{मुझे खुशी है की, जे अँड सन्स गारमेंट्स मे बिना कमरवाली बेढ़ंगी जींस पैंट नहीं सिलाई जाती}
दीन ए इस्लाम का सबसे आला महीना, मुबारक महीना, बरकतों वाला महीना माहे रमज़ान शुरू हो चुका है। इसलिए हमसब मुसलमाँ कसीर तादाद में रोज़े रख रहे हैं। पांँच वक्त की नमाज़ पढ़ रहे हैं। क़ुरआन ए पाक की तिलावत कर रहे हैं।
यह सब करते वक्त नौजवानों की एक हरकत ऐसी है जो बहुत खल रही है। जिससे उनके साथ ही और लोगों को भी तकलीफ हो रही है।
जिसको दुरुस्त किया जा सकता है और करना भी चाहिए यह ज़रूरी है। इसी बात पर आज मैं अपनी तरफ से उन नौजवानों के साथ ही उनके मांँ-बाप और उलमा ए दिन की तवज्जो चाहता हूंँ।
वह हरकत, वह बात क्या है जिसे नज़रअंदाज़ कर देना गलत हो रहा है। इस बारे में आज मैं अपने इस आर्टिकल के जरिए आप सबके सामने रख रहा हूंँ।
इसको पढ़कर नौजवानों के साथ ही उनके मांँ-बाप और उलमा ए दिन इस तरफ तवज्जो दिए तो इस आर्टिकल को लिखने का मंशा कामयाब हुआ, ऐसा मैं समझूंगा।
तो चलिए बताता हूंँ कि, वह कौन सी हरकत है, कौन सी बात है, जिसको आप सबके सामने पेश कर रहा हूँ, तो लीजिए पूरा पढ़िए -
हमारे नौजवान माहे रमज़ान में नमाज़ पढ़ते हैं, रोज़े रखते हैं। यह एक तरफ अच्छी बात है, तो दूसरी तरफ कई नौजवान टाइट जींस और शर्ट टी-शर्ट पहनते हैं। इसवजह से उन्हें अपने जिस्म की हलचल आसानी से करनी नहीं आती। इस वजह से ऐसे टाइट जींस पहनने वाले कई नौजवान मस्जिदों के तहारत खानों में खड़े होकर पेशाब करते नज़र आ रहे है।
ताअज़्जुब है कि, इस बात का उन्हें कोई मलाल नहीं हो रहा है और ना ही कोई उन्हें टोक रहा है, बड़े शर्म की बात है।
जैसे फिल्म देखने टॉकीज में गए लोग वहांँ की मुतारी में खड़े होकर पेशाब करते हैं, उस तरह अब ऐसे टाइट जींस पहनने वाले नौजवान मस्जिदों के तहारत खानों में भी खड़े रहकर ही पेशाब कर रहे हैं। बड़े शर्म की बात है।यह नौजवान जींस पैंट बिना कमर वाली पहनते हैं। जिसके पायचों को ही ऊपर ढ़ीला बेल्ट लगाकर पैंट की शक्ल दी जा रही है। जींस की इस पैंट में कमर बनाई ही नहीं जाती। सिर्फ़ पायचों को बेल्ट के जरिए एक करके सिल्वा दिया जाता है। और ऊपर से शॉर्ट टी-शर्ट पहनने के बाद तो खुदा खैर करे!
इस लिबास को पहनकर जब ऐसे नौजवान मस्जिदों की सफ़ में नमाज़ के लिए खड़े होते हैं और रुकूअ में जाते हैं, तब इनका शॉर्ट टी-शर्ट ऊपर खिसक जाता है और बिना कमर वाली, ढ़ीले बेल्ट वाली जींस पैंट नीचे की ओर खिसक जाती है। जिससे उनकी आधी कमर खुली हो जाती है। इस वजह से ऐसे नौजवानों के पीछे सफ़ में खड़े नमाजियों की नज़र रुकूअ में जाते वक्त या रुकूअ से उठते वक्त उसके खुले हिस्से पर पड़ी *(आँखे बंद करके नमाज़ पढ़ना मना है)* तो उस बेचारे की कोई ग़लती ना होते हुए भी उसकी नमाज़ खराब हो जाती है।
लेकिन इस तरफ ना तो ऐसे नौजवानों के मां-बाप ध्यान दे रहे हैं और ना ही उलमा ए दिन।
टाइट और गलत पेहराव की वजह से आगे और न जाने क्या-क्या देखना पड़ेगा।
इसलिए अब हर मस्जिद के तहारत खाने और मस्जिदों में लिख देना चाहिए की,
1) *खड़े रहकर पेशाब करना सख्त मना है, बैठकर पेशाब करें।*
2) *बिना कमर वाली जींस पहनकर नमाज़ पढ़ना सख्त मना है।*
3) *मस्जिदों के तहारत खाने और दूसरों की नमाज़ खराब करने का तुम्हें कोई हक़ नहीं*
ऐसी सख्त हिदायते उलमा ए दिन की तरफ से जारी होना चाहिए, तभी शायद ऐसे नौजवानों के साथ ही उनके माँ-बाप भी ध्यान देंगे।
*टेलरों का भी बड़ा हाथ*
इस तरह के बेढ़ंगे पेहराव और उसके चलन को आम करने में कपड़े सिलवाने वाले टेलरों का भी बड़ा हाथ है। पायचों को ढ़िला बेल्ट लगाकर पैंट बनाने से उन्हें कपड़े को कमर का शेप देने की ज़रूरत नहीं पड़ती। जिससे उनका काम बच जाता है। वक्त और मेहनत भी बचती है। इसी वजह से उन्होंने बिना कमर वाली बेढ़ंगी जींस पैंट का चलन आम कर दिया है। यह भी बड़े दुःख की बात है।
*जींस ही पहनना है तो पूरे कमर वाली ढंग की जींस सिलवाओ। जिसका बेल्ट कमर की माप का हो, ढ़ीला ना हो। पैंट ढ़ीली ढ़ाली हो, टाइट ना हो। पायचों को बेल्ट चिपकाया ना हो बल्कि कमर तैयार करके उसपर बेल्ट लगाया गया हो। ऐसी जींस पहनो बाबा। बेढ़ंगे कपड़े पहनकर खुद की और अपने मांँ-बाप की भी इज़्ज़त क्यों ड़ाल रहे हो? खुद की नहीं तो कम से कम अपने मांँ-बाप की इज़्ज़त का तो ख़याल करो। दीन-ए-इस्लाम का एहतराम करो।*
लेखन - एस.एम.युसूफ़
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